टूटी टहनी का सन्देश
आपस में प्यार पूरा था,
दिल जिसके बिना अधूरा था।रिश्तों में जो अधूरा था,
उसे भी पूरा किया गया।
पर मानो किसी की नज़र लगी,
एक पल में वह सब टूट गया।
अब टूट गया तो टूट गया,
इस पर इतना क्या रोना है?
टूटे पेड़ों की टहनी देखो,
तने से निकलते आँसू देखो।
तने में लगे पत्तों को देखो,
दोनों को ऐसा लगता होगा—
जुड़े रहते तो हरे रहते,
तने के साथ खड़े रहते।
चारों ओर हरियाली होती,
आँधी आती, रखवाली होती।
पर तना ज़रा घबराया था,
टहनी के टूट जाने से।
कंधों पर भार उठाया था,
हर आँधी के आ जाने से।
आँधी का आना तो तय है,
फिर टूट जाने का भय है।
क्या टहनी टूट जाने पर
पेड़ इतना शोक मनाता है?
क्या बीती बातों को कोई
इतनी बार दोहराता है?
अरे, उठो चलो, फिर शुरू करो,
कई फल नए उगाना है।
नए पत्तों और टहनियों को
पेड़ बनकर दिखाना है!
-आलोक सिंह भारद्वाज

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