अपना किताबघर
“ किसी को कितनी उत्तम शिक्षा मिली है इसका पता इससे नहीं लगाया जा सकता है की उसके पास किसी विश्वविद्यालय की उपाधि है या नहीं ; बल्कि इस बात से पता लगाया जा सकता है की उसे पुस्तकालय का उपयोग करना आता है की नहीं” सर साइरिल नारवुड पुस्तकालय का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में अनायास ही आता है की अरे पुस्तकालय मतलब पुस्तकों का घर जहाँ पे अलग अलग प्रकार की अनेकानेक किताबें रखी गयीं होती हैं, जिसमे जाकर अपने रूचि अनुरूप किसी भी पुस्तक का लाभ लिया जा सकता है, पर पुस्तकालय सिर्फ पुस्तकों का घर ही नहीं अपितु समाज निर्माण का एक अहम् और सबसे सशक्त साधन भी है | समाज में सर्वोन्मुखी विकाश में पुस्तकालयों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है | पुस्तकालय विश्व के महानतम विचारों का आगर है | यह सिर्फ हमारे ज्ञान को ही नहीं बल्कि हमारी आत्मा का भी विस्तार करता है | किसी भी संस्थान का ह्रदय होता है उसका पुस्तकालय और यूँ कहें तो पुस्तकालय एक सामाजिक क्रांति की अग्रिम मशाल भी लेकर आता है | यह शिक्षा के प्रसार और सुचना के संचार का प्रभावशाली माध्यम है | समाज में अलग-अलग...